Gau

कान्हा मुरली वाला रे, वो है नन्द का लाला रे। जब वो अंगना मेँ खेले रे, मन सभी का हर ले रे, सारे ब्रज का उजाला रे॥ मोर मुकुट पीताम्बर, मेघवर्ण लगे सुन्दर, बाजे पेँजनिया चले जब ठुमककर, काली कमली वाला रे ||1|| गायेँ जब ये चराये, बंशी मधुर बजाये, जादू ऐसा छा जाये, गोपियाँ …

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